कोरिया जिले में धान खरीदी के अंतिम दिनों में एडजस्टमेंट एवं मिलावट का खेल जोरो पर

कोरिया जिले में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के लिए अंतिम दिनों में हैं। इसी बीच कुछ धान खरीदी केंद्रों पर “एडी” करने की छूट दिए जाने के बाद हालात और भी संवेदनशील हो गए हैं। ज़मीनी स्थिति यह है कि अधिकांश खरीदी केंद्रों से प्रशासनिक अधिकारी नदारद हैं, जिससे बचे हुए दिनों में बड़े पैमाने पर धान के एडजस्टमेंट और गड़बड़ियों की आशंका गहराती जा रही है।

सूत्रों के अनुसार पटना जैसे संवेदनशील धान खरीदी केंद्र पर अनियमितताओं की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। खास तौर पर नए धान में पुराने धान को मिलाकर बिक्री किए जाने का मामला भी देखने को मिल रहा है। गुणवत्ता जांच के अभाव और अधिकारियों की गैरमौजूदगी का फायदा उठाकर यह खेल खुलेआम चल रहा है, लेकिन निगरानी के नाम पर जिम्मेदार महकमा आंख मूंदे बैठा नजर आ रहा है।

सूत्रों के मुताबिक पटना जैसे संवेदनशील धान खरीदी केंद्र पर पहले भी गड़बड़ियों की शिकायतें सामने आती रही हैं। यदि इन केंद्रों पर तत्काल प्रशासनिक अधिकारियों की तैनाती कर दी जाए और सख्त निगरानी रखी जाए, तो कई सौ क्विंटल धान के एडजस्टमेंट को रोका जा सकता है। इससे शासन को होने वाले लाखों रुपये के संभावित आर्थिक नुकसान से भी बचाया जा सकता है। कुल मिलाकर अब किसान के धान की बिक्री आड़ में बिचौलियों का धान बिक्री का खेल बड़े स्तर पर चल रहा है।

दरअसल, एडजस्टमेंट के खेल में धान समिति में आए बिना ही सीधे मिलर तक पहुंचा दिया जाता है और कागजों में खरीदी दिखा दी जाती है। यदि बचे हुए दो दिनों में इन संवेदनशील केंद्रों पर प्रशासनिक अधिकारियों की तैनाती कर दी जाए और हर शाम समिति में आए धान का भौतिक सत्यापन कराया जाए, तो बड़े खुलासे संभव हैं। जानकारों का मानना है कि समय रहते सख्ती नहीं बरती गई, तो अंतिम दो दिनों में बड़े स्तर पर एडजस्टमेंट और मिलावट का खेल होना तय है, जिससे शासन को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता 

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